शारदीय नवरात्री 2021, माता के नौ स्वरुप और नौ तीर्थ । क्यों मनाया जाता है नवरात्री ?

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शारदीय नवरात्री 2021, माता के नौ स्वरुप और नौ तीर्थनवरात्री हमारे देश में प्रमुखता से मनाया जाने वाला त्यौहार है । नवरात्री का विशेष महत्त्व है । नवरात्री का क्या अर्थ है (What is the meaning of Navratri) ? , नवरात्री क्यों मनाई जाती है (Why is Navratri celebrated) ? नवरात्री की कहानी क्या है (Navratri story) , वर्ष में कितनी नवरात्री आती है ? कुल कितनी देवियां है ? ऐसे ही कुछ सवालों और नवरात्री के बारे में अनेक जानकारियों के साथ हम हाजिर हैं । नवरात्री के दौरान 9 रातों और 9 दिन के अंदर तीनो शक्तियों। लक्ष्मी , सरस्वती और काली के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना धूमधाम से की जाती है ।

वर्ष में कितनी नवरात्री आती है ?

एक प्रश्न ये आता है कि वर्ष में कितनी नवरात्री आती है ? लगभग सबको यही पता है कि एक वर्ष में 2 नवरात्री आती है लेकिन ये सत्य नहीं है । दरअसल हम 2 नवरात्री ही प्रमुखता से मानते है इसलिए हमें ये लगता है कि वर्ष में सिर्फ 2 ही नवरात्री आती है । सत्य ये है कि एक वर्ष में 4 नवरात्री होती है जो कि पौष,चैत्र,आषाढ़ और अश्विन मास में आती है । ये पर्व इन महीनों के प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मनाया जाता है ।

नवरात्री का क्या अर्थ है (What is the meaning of Navratri) ?

नवरात्री का क्या अर्थ है , नवरात्री एक संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है नौ रातें । हिन्दू परंपरा में देवियों को शक्ति का रूप माना गया है । प्रमुख रूप से तीन देवियां है , लक्ष्मी,सरस्वती और काली । तीनों देवियों के अनेक रूप हैं । नवरात्री के पर्व में तीनो देवियों के नौ रूपों की पूजा की जाती है । शक्ति के नौ रूप इस प्रकार हैं ।

शारदीय नवरात्री 2021, माता के नौ स्वरुप

शारदीय नवरात्री 2021, माता के नौ स्वरुप इस प्रकार हैं ।

  1. शैलपुत्री

नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है शैलपुत्री । पर्वतों के राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा । देवी के नौ रूपों के प्रथम स्वरुप के रूप में माता शैलपुत्री को ही माना जाता है । नवरात्री के प्रथम दिन शैलपुत्री की ही पूजा और आराधना बड़े धूमधाम के साथ की जाती है । इस दिन योगीजन अपनी उपासना में अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर करते हैं ।

  1. ब्रह्मचारिणी

भविष्य पुराण के अनुसार तप आचरण करने वाली होती है ब्रह्मचारिणी । ब्रह्म का अर्थ तप और चारिणी का अर्थ होता है आचरण , इस प्रकार तप का आचरण करने वाली माता को ब्रह्मचारिणी माता कहा जाता है । नवरात्री के दूसरे दिन माता के भक्त अपने मन को माँ के चरणों में लगाते है । इस रूप में माता के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है ।

  1. चंद्रघंटा

नवरात्री के तीसरे दिन माता के चंद्रघंटा स्वरुप की आराधना की जाती है । नवरात्री के तीसरे दिन का काफी महत्त्व माना जाता है । इस दिन योगी अपने मन को मणिपुर चक्र में प्रवेश करवाते हैं ।

  1. कुष्मांडा

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की पूजा और उपासना की जाती है । इस दिन साधक का मन ‘अनाहत’ चक्र में रहता है । अतः ऐसा मन जाता है कि इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और स्थिर मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना का कार्य करना चाहिए ।

  1. स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की उपासना की जाती है । स्कंदमाता को मोक्ष का द्वार खोलने वाली माता माना जाता हैं । इस दिन मन से पूजा करने से माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।

  1. कात्यायनी

कात्यायनी हिंदी देवी माँ पार्वती का छटा स्वरुप है । भक्तजन नवरात्री के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा करते हैं ।

  1. कालरात्रि

दुर्गा माता का सालवन स्वरुप कालरात्रि के नाम जाना जाता है । नवरात्री में दुर्गा पूजा के सातवें दिन माता कालरात्रि की उपासना का दिन होता है । इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है जिससे ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुल जाता है। माता कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी – काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृित्यू, रुद्रानी, चामुंडा आदि नामों से जाना जाता है ।

  1. महागौरी

माता की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है । दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना विधिविधान से करनी चाहिए । इनकी शक्ति अमोघ और फलदायिनी है। महागौरी की उपासना से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं ।

  1. सिद्धिदात्री

माता की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं । ये सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन पुरे विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले भक्त को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।

माता के प्रमुख तीर्थ कौन कौन से है ?

शारदीय नवरात्री 2021, माता के नौ स्वरुप और नौ तीर्थ में अब हम बताने जा रहे हैं ,जैसे माता के नौ स्वरुप हैं वैसे ही माता के नौ प्रमुख तीर्थ स्थान हैं , जो कि इस प्रकार हैं।

  1. माता वैष्णो देवी – कटरा (जम्मू)
  2. माता चामुंडा देवी – कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
  3. वज्रेश्वरी माता – कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
  4. ज्वालामुखी माँ- ज्वाला जी (हिमाचल प्रदेश)
  5. चिंतपूर्णी माता – ऊना (हिमाचल प्रदेश)
  6. माँ नयनादेवी – विलासपुर (हिमाचल प्रदेश)
  7. माँ मनसादेवी – पंचकूला (हरयाणा)
  8. मन कालका देवी – कालका (हिमाचल प्रदेश)
  9. माँ शाकम्भरी – सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

नवरात्री क्यों मनाई जाती है (Why is Navratri celebrated) ?

नवरात्री क्यों मनाई जाती है, नवरात्री की कहानी क्या है (Navratri story) ,आइये देखते हैं कि नवरात्री को मनाने के पीछे की कहानी क्या है । जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को माता सीता को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध करना था । युद्ध के दौरान ब्रह्मा जी ने भगवान् श्री राम को चंडी की अराधना करके माता को प्रसन्न करने का सुझाव दिया ।

माता चंडी के हवन व यज्ञ के लिए 108 नीलकमल की व्यवस्था की गई थी । पूर्ण विधिविधान के साथ माता का यज्ञ और हवन चल रहा था ।
चूँकि रावण नहीं चाहता था कि श्री राम का ये यज्ञ पूर्ण हो,रावण ने एक नीलकमल अपनी मायावी शक्ति से गायब कर दिया । विधि के अनुसार जिस समय नीलकमल की आहुति लगनी थी तब वहां पर वो नीलकमल नहीं था और इतनी जल्दी व्यवस्था होना भी मुश्किल था ।

ऐसा लग रहा था कि यज्ञ संपन्न ही नहीं हो पायेगा और ये डरे था कि कहीं माता रुष्ट न हो जाये । भगवान राम को अचानक याद आया कि उन्हें भी कमलो नयन कहा जाता है । ये सोच कर वे अपना एक नेत्र निकाल कर उसकी आहुति देने के आतुर हुए । जैसे ही भगवान् ने अपना नेत्र निकालने के लिए अपना वाण उठाया माता स्वयं प्रकट हुईं और उन्होंने श्री राम से प्रसन्न होकर विजयश्री का आशीर्वाद दिया । इस के बाद से कहते हैं की नवरात्री में माता का अनुष्ठान किया जाने लगा ।

एक और प्रचलित कथा के अनुसार , महिषासुर नाम के राक्षस ने अपने अर्जित शक्तियों के बल पर स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया था । उसने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण और अन्य देवताओं को समस्त अधिकारों से वंचित कर दिया था । तब सब देवताओं ने अपनी अपनी शक्ति प्रदान करके देवी दुर्गा की रचना की ।

देवी दुर्गा को सभी देवताओं ने अपने अपने अस्त्र और अपना बल प्रदान किया जिस से देवी अत्यंत बलवान हो गईं । माता ने नौ दिनों तक लगातार महिषासुर से साथ युद्ध करके उसका अंत किया । इसी के उपलक्ष में नवरात्री में माता की उपासना की जाती है ।

नवरात्रि के दौरान माता के भक्त उपवास रखते हैं । भक्तजन माता के व्रत में इस व्रत के समय मांस मदिरा के अलावा अन्न का भी त्याग करते हैं । नवरात्रि को आत्मनिरीक्षण और शुद्धि का काल माना जाता है और ये कार्य शुरू करने के लिए एक शुभ समय है।

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